
गाजियाबाद,(आनन्द धारा)। राजनगर एक्सटेंशन स्थित एक निर्माणाधीन मॉल में 7 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ हुई सामूहिक दुष्कर्म और जघन्य हत्या की हृदयविदारक घटना ने पूरे उत्तर प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस संवेदनशील और गंभीर मामले को लेकर अब मीडिया जगत और सामाजिक संगठनों ने भी न्याय की आवाज बुलंद कर दी है। ‘एक्टिव जर्नलिस्ट एसोसिएशन ट्रस्ट’ की अध्यक्ष अपूर्वा चौधरी ने इस मामले को लेकर सीधे तौर पर गाजियाबाद के पुलिस कमिश्नर के सामने मोर्चा खोल दिया है। अपूर्वा चौधरी ने पुलिस कमिश्नर महोदय को एक प्रार्थना पत्र सौंपकर मुख्य आरोपियों के साथ-साथ इस पूरी घटना के पीछे छिपी मॉल प्रबंधन, ठेकेदार और सुरक्षा एजेंसी की घोर प्रशासनिक और आपराधिक लापरवाही पर बेहद सख्त लहजे में कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
अपूर्वा चौधरी ने पुलिस प्रशासन द्वारा मुख्य आरोपियों (शहाबुद्दीन और विनय कुमार) को तत्परता से गिरफ्तार किए जाने की कार्रवाई की सराहना तो की, लेकिन उन्होंने सीधे तौर पर बिल्डर और सुरक्षा तंत्र की भूमिका को कठघरे में खड़ा किया। पुलिस कमिश्नर को भेजे पत्र में अपूर्वा चौधरी ने बेहद तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा: “जिस परिसर में दिन-रात 23-23 गार्ड्स की भारी-भरकम फौज तैनात हो, जहाँ चारों तरफ सीसीटीवी कैमरे लगे हों, वहाँ अपराधी पिछले 10 दिनों से मासूम बच्चों को बहला-फुसला रहे थे और अंततः इतनी बड़ी वारदात को अंजाम दे दिया। यह सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था का पूरी तरह से फेल होना है। आज मॉल के मेंटेनेंस इंचार्ज, सिक्योरिटी इंचार्ज और ठेकेदार अपनी जिम्मेदारी एक-दूसरे पर मढ़ रहे हैं, जबकि इस मासूम की जान बचाने में ये सब नाकाम रहे।”
अपूर्वा चौधरी ने मामले की गहराई में जाते हुए एक बड़े नियम उल्लंघन का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि दोनों मुख्य आरोपी बिना किसी पुलिस वेरिफिकेशन (सत्यापन) और बिना वैध पहचान पत्र के ही मॉल की साइट पर रह रहे थे। उन्होंने कानून के उल्लंघन का हवाला देते हुए मांग की है कि बिना जांच के बाहरी राज्यों के संदिग्ध लोगों को अपने यहाँ रखने के जुर्म में ठेकेदार और बिल्डर प्रबंधन पर तत्काल कठोर दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही उस सुरक्षा एजेंसी का लाइसेंस तुरंत निरस्त किया जाना चाहिए जो सुरक्षा देने में पूरी तरह विफल रही।
अपूर्वा चौधरी के नेतृत्व में ‘एक्टिव जर्नलिस्ट एसोसिएशन ट्रस्ट’ ने पुलिस प्रशासन के समक्ष निम्नलिखित मुख्य बिंदु रखे हैं: आपराधिक लापरवाही का मुकदमा: जिम्मेदारी से भाग रहे मॉल के मेंटेनेंस इंचार्ज, सिक्योरिटी इंचार्ज और ठेकेदार पर आपराधिक लापरवाही (Criminal Negligence) के तहत तत्काल केस दर्ज हो। लाइसेंस निरस्तीकरण: सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक के लिए जिम्मेदार सुरक्षा एजेंसी की जांच कर उसका लाइसेंस रद्द किया जाए। बिल्डर पर कार्रवाई: बिना पुलिस सत्यापन के संदिग्ध मजदूरों को रखने के लिए बिल्डर प्रबंधन को सह-आरोपी बनाया जाए।पूरे जिले में महा-सत्यापन अभियान: गाजियाबाद के अन्य सभी निर्माणाधीन प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे बाहरी मजदूरों का अनिवार्य पुलिस वेरिफिकेशन कराया जाए।
अपूर्वा चौधरी कहा कि समाज के सबसे कमजोर तबके की सुरक्षा का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाया। उन्होंने भावुक और कड़े शब्दों में कहा कि जब तक इस घोर लापरवाही के जिम्मेदार रसूखदार प्रबंधन तंत्र और ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक दूसरों को सबक नहीं मिलेगा। निर्माणाधीन साइटों पर रहने वाले गरीब मजदूरों के बच्चे इसी तरह असुरक्षित माहौल में जीने को मजबूर रहेंगे। उन्होंने पुलिस कमिश्नर से अपील की है कि पीड़ित परिवार को पूर्ण न्याय दिलाने और भविष्य में ऐसी किसी घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रशासन को एक सख्त नजीर पेश करनी ही होगी।



