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श्रीराम कथा में बाल स्वरूप से राम भक्त हुए अभिभूत

गाज़ियाबाद। दिनांक 2 अक्टूबर, 2024 को हिंदी भवन, लोहिया नगर, गाज़ियाबाद में परम पूज्य डॉ. पवन सिन्हा गुरु जी के सान्निध्य में उनके आशीष वचनों के साथ पूजनीया श्री गुरुमाँ डॉ. कविता अस्थाना जी द्वारा श्री राम लला के बाल स्वरूप की कथा का प्रारंभ हुआ। यह कथा अनेक अर्थों में महत्वपूर्ण है – श्री राम जी के जन्म के बारे में प्रामाणिक जानकारी प्राप्त होना और उनके जीवन से जुड़े अनेक प्रसंगों की सत्यता के बारे में जानना। समाज का एक वर्ग ऐसा भी है जो श्री राम को मिथ, मिथक या कल्पित व्यक्ति मानता है। लेकिन यह भ्रांति है और कुछ लोग जानबूझकर ऐसी भ्रांति फैला रहे हैं जिससे सनातन संस्कृति की हानी होती है।

श्रीराम जी के जीवन के अनेक प्रश्नों के उत्तर देने वाली यह कथा बताती है कि श्रीराम जी जन्म कब हुआ था? क्या सच में माँ सीता का स्वयंवर हुआ था? श्री राम जी द्वारा धनुष तोड़े जाने की क्या कथा है? परशुराम जी जब शिव धनुष के टूट जाने पर कुपित हुए तो श्री राम जी ने क्या किया? क्या वे चुपचाप अपने पिता यानी राजा दशरथ का अपमान सहन करते रहे? नहीं, ऐसा कुछ नहीं हुआ था! राम कथा ने जन समुदाय में फैली भ्रांतियों को समाप्त करने का कार्य किया और धर्म की स्थापना, सनातन संस्कृति के संरक्षण का कार्य किया।

श्रीराम जी के भजनों एवं दीप प्रज्वलन से राम कथा का शुभारंभ हुआ और आयोजकों द्वारा व्यासपीठ पर शोभायमान महिमा वाचक आदरणीय गुरु माँ डॉ. कविता अस्थाना जी का तिलक वंदन कर स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।
इसके उपरांत परम पूज्य प्रो.पवन सिन्हा गुरुजी ने अपने आशीष वचनों से सभी को अनुगृहीत किया और आयोजकों को बधाई दी कि ऐसे समय में जब श्री राम जी की अस्मिता, उनके सत्य होने पर ही अनेक प्रश्न चिह्न लगाए जा रहे हैं, ऐसे समय में राम कथा का आयोजन किया गया।

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