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माँ बगलामुखी महायज्ञ, 31 लाख आहुतियों के साथ दिव्य अनुष्ठान का सफल समापन

गाज़ियाबाद। चतुर्थ दिल्ली-एनसीआर माँ बगलामुखी महायज्ञ, जिसमें 11 कुण्डीय यज्ञ के अंतर्गत 31 लाख आहुतियाँ अर्पित की गईं, का भव्य समापन 17 अक्टूबर को पूर्णाहुति एवं भंडारे के प्रसाद के साथ श्रद्धा और उल्लासपूर्वक संपन्न हुआ। यह दिव्य महायज्ञ गाज़ियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित रामलीला ग्राउंड के समीप आयोजित किया गया था। महायज्ञ का शुभारंभ 12 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय ध्यान गुरु स्वामी दीपांकर जी महाराज के पावन सान्निध्य में विधिपूर्वक सम्पन्न हुआ। प्रतिदिन प्रातःकाल रुद्राभिषेक का आयोजन किया गया, जिसमें भक्तजन अपार श्रद्धा एवं भक्ति के साथ भाग लेते रहे।

अंतर्राष्ट्रीय ध्यान गुरु स्वामी दीपांकर जी महाराज के विशेष कृपापात्र शिष्य अश्वनी (अखंड भारत मिशन) और पवन योगी-शिष्य श्री 1008 ब्रह्मलीन ब्रह्मानंद सरस्वती जी महाराज ने बताया कि हजारों की संख्या में श्रद्धालु माँ बगलामुखी का आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु इस महायज्ञ में शामिल हुए और इसकी दिव्यता का गहन अनुभव किया। उन्होंने यह भी बताया कि स्वामी दीपांकर जी के मार्गदर्शन के अनुरूप, क्षेत्रवासियों को माँ बगलामुखी की अनुकंपा निरंतर प्राप्त हो, इसी उद्देश्य से यह यज्ञ प्रति वर्ष आयोजित किया जाता है। आगे उन्होंने बताया की माँ बगलामुखी को दस महाविद्याओं में से एक माना जाता है, जो अपने भक्तों को शत्रु पर विजय और जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति दिलाने में सहायक होती हैं। उन्हें न्याय की देवी माना जाता है, जो वाणी, विचार और कर्म पर नियंत्रण स्थापित करने में मदद करती हैं। माँ बगलामुखी की साधना से भक्तों को आत्मिक बल प्राप्त होता है और उनकी कृपा से जीवन में शांति और समृद्धि का आगमन होता है। मान्यता है कि माँ बगलामुखी के आशीर्वाद से व्यक्ति के समस्त विरोध शांत होते हैं और साधक को विजय प्राप्त होती है।

महायज्ञ के सफल आयोजन में मुख्य रूप से ज्ञानेन्द्र भारतीय (सर्व धर्म शक्ति), प्रवीण, निखिल और यज्ञाचार्य सूर्यांश सहित अनेक भक्तों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। साथ ही, देवी माँ बगलामुखी के सभी भक्तों ने इस भव्य आयोजन में सहभागिता कर माँ का आशीर्वाद प्राप्त किया और आयोजन की सफलता में अपना योगदान दिया।

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