
नई दिल्ली/काठमांडू। सुधन गुरुंग ने भारी विवादों के बीच बुधवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। महज 26 दिन के संक्षिप्त कार्यकाल के बाद उनका यह कदम नेपाल की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। हाल के दिनों में उन पर लगे भ्रष्टाचार और संदिग्ध निवेश के आरोपों ने उनके लिए स्थिति कठिन बना दी थी।
जानकारी के अनुसार, सुधन गुरुंग पर विवादास्पद कारोबारी दीपक भट्टा के साथ व्यापारिक साझेदारी और माइक्रो इंश्योरेंस कंपनियों में संदिग्ध निवेश के आरोप लगे थे। इन आरोपों के सामने आने के बाद विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। मीडिया रिपोर्ट्स में भी ऐसे दस्तावेजों का हवाला दिया गया, जिससे उनके खिलाफ जनदबाव लगातार बढ़ता गया।
गौरतलब है कि गृह मंत्री बनने के बाद गुरुंग ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया था और कई मामलों में सख्ती दिखाई थी। लेकिन विडंबना यह रही कि उन्हीं पर निजी निवेशों को लेकर सवाल उठने लगे। इससे उनकी छवि को गहरा नुकसान पहुंचा और राजनीतिक विरोधियों को सरकार पर हमला बोलने का मौका मिल गया।
नेपाल की राजधानी काठमांडू समेत कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन भी हुए। प्रदर्शनकारियों ने गुरुंग के इस्तीफे की मांग करते हुए पारदर्शिता और जवाबदेही की बात उठाई। विपक्ष का कहना था कि जब तक आरोपों की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक उनका पद पर बने रहना उचित नहीं है।
लगातार बढ़ते दबाव और आलोचनाओं के बीच अंततः सुधन गुरुंग ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे को सरकार के लिए एक झटका माना जा रहा है, क्योंकि यह मामला सीधे तौर पर सरकार की छवि से जुड़ा हुआ था।
अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती नए गृह मंत्री की नियुक्ति और इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम नेपाल की राजनीति में पारदर्शिता और जवाबदेही की बहस को और तेज करेगा।



