
गाजियाबाद,(आनन्द धारा )। इस वर्ष अक्षय तृतीया का पावन पर्व 19 अप्रैल को अत्यंत शुभ संयोगों-आयुष्मान योग, धूम्रयोग और गजकेसरी योग-में मनाया जाएगा। ज्योतिषीय दृष्टि से यह संयोग बेहद दुर्लभ और फलदायी माना जाता है, जिससे इस दिन किए गए शुभ कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है। शिव शंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र के पंडित शिवकुमार शर्मा के अनुसार, 19 अप्रैल को प्रातः 7:28 बजे तृतीया तिथि का आरंभ होगा। यही कारण है कि अक्षय तृतीया का प्रभाव पूरे दिन रहेगा और यह तिथि अगले दिन 20 अप्रैल को सुबह 7:27 बजे तक विद्यमान रहेगी। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाने वाला यह पर्व अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन त्रेता युग का आरंभ हुआ था और भगवान परशुराम का अवतार भी इसी तिथि को हुआ था। “अक्षय” शब्द का अर्थ है-जो कभी नष्ट न हो। इसलिए इस दिन किए गए शुभ कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, भूमि पूजन, नए कार्यों की शुरुआत आदि का फल स्थायी और बढ़ने वाला माना जाता है।
अक्षय तृतीया के अवसर पर सोना-चांदी, बर्तन और घरेलू उपयोग की वस्तुएं खरीदना भी बेहद शुभ माना जाता है। इसके साथ ही नया व्यापार शुरू करना, निवेश करना, अनुबंध करना या संपत्ति की रजिस्ट्री कराना भी अत्यंत लाभकारी होता है। यह दिन “अबूझ मुहूर्त” के रूप में भी प्रसिद्ध है, यानी यदि किसी कारणवश विवाह के लिए शुभ मुहूर्त न मिल रहा हो तो इस दिन बिना विशेष परामर्श के भी विवाह किया जा सकता है।
पूजन-विधि की बात करें तो इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है। प्रातःकाल स्नान आदि से निवृत्त होकर घर के मंदिर में भगवान विष्णु के साथ मां लक्ष्मी का पूजन करना चाहिए। श्रीसूक्तम का पाठ, विष्णु सहस्त्रनाम का जाप और भगवान को सफेद वस्तुओं का भोग अर्पित करना अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है।
मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा सदैव घर में बनी रहती है, जिससे सुख-समृद्धि और वैभव का वास होता है।
अक्षय तृतीया न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि जीवन में सकारात्मकता, समृद्धि और नई शुरुआत का भी संदेश देता है।



