गाजियाबाद निटरा में राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस: मिल्कवीड नवाचार से ‘आत्मनिर्भर भारत’ को मिलेगी नई दिशा

गाजियाबाद,(आनंद धारा)। निटरा में 9 अप्रैल को एक दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया, जिसका विषय “सुरक्षात्मक वस्त्रों में नवाचार (Innovations in Protective Textiles)” रहा। सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय वस्त्र मंत्री Giriraj Singh एवं उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री Rakesh Sachan ने किया। इस अवसर पर केवीआईसी की सीईओ रूप राशी, संयुक्त सचिव मनीषा चटर्जी, निटरा चेयरमैन विदित जैन, डिप्टी चेयरमैन संदीप होरा और महानिदेशक डॉ. एम.एस. परमार उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।
सम्मेलन के दौरान मंत्रियों ने निटरा परिसर में ऑक/मिल्कवीड (Milkweed) की खेती का निरीक्षण किया और इसकी प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने वैज्ञानिकों एवं पत्रकारों से इस नवाचार पर चर्चा करते हुए इसे Narendra Modi के “स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत” के सपने को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। डॉ. एम.एस. परमार के नेतृत्व में विकसित मिल्कवीड फाइबर तकनीक की सराहना करते हुए इसे किसानों के लिए लाभकारी बताया गया।

निटरा महानिदेशक डॉ. परमार ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह कॉन्फ्रेंस सुरक्षात्मक वस्त्रों के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगी। चेयरमैन विदित जैन ने अपने संबोधन में निटरा की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए डॉ. परमार के शोध कार्यों की प्रशंसा की और संस्थान को निरंतर सहयोग देने का आग्रह किया।
इस अवसर पर मंत्रियों द्वारा डॉ. परमार की मिल्कवीड पर लिखित पुस्तक का विमोचन तथा CLOCellTM पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री का लोकार्पण किया गया। इसे किसानों और नई पीढ़ी के लिए उपयोगी जानकारी का महत्वपूर्ण स्रोत बताया गया। बताया गया कि इस फसल की खेती देश के विभिन्न हिस्सों में परीक्षण के तौर पर की जा रही है और भविष्य में इसे व्यावसायिक स्तर पर बढ़ावा दिया जाएगा।
अपने संबोधन में राकेश सचान ने कहा कि यह परियोजना न केवल गाजियाबाद बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने राज्य सरकार की ओर से निटरा और डॉ. परमार को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। वहीं गिरिराज सिंह ने कहा कि मिल्कवीड की खेती किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती है, क्योंकि इसमें कम लागत में अधिक आय की संभावना है। उन्होंने बताया कि इस पौधे के सभी हिस्से आय का स्रोत बन सकते हैं।
कार्यक्रम के दौरान निटरा द्वारा विकसित “मिल्कवीड फ्लोस और सीड सेपरेटर” मशीन का अनावरण भी किया गया, जो बीज और रेशे को अलग करने में सहायक है। इसके बाद तकनीकी सत्रों में देशभर से आए वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और उद्योगपतियों ने अपने शोध प्रस्तुत किए और सुरक्षात्मक वस्त्रों के भविष्य पर विचार साझा किए।

अंत में डॉ. परमार ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों की निरंतरता पर जोर दिया। उन्होंने इस कॉन्फ्रेंस के प्रायोजक एनटीटीएम और मिशन डायरेक्टर अशोक मल्होत्रा का विशेष धन्यवाद किया।



