
देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र मंगलवार को सुबह 11 बजे शुरू हुआ, जिसमें महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दे पर जोरदार बहस के आसार हैं। सत्र की शुरुआत से ही राजनीतिक माहौल गरमाता नजर आया और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक की संभावना बनी हुई है।
सत्र के दौरान सत्तापक्ष द्वारा संसद में पेश किए गए नारी शक्ति वंदन अधिनियम संशोधन बिल का समर्थन किया जाएगा। सरकार का मानना है कि यह विधेयक महिलाओं को राजनीति में अधिक भागीदारी देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। वहीं, विपक्ष विशेष रूप से कांग्रेस इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के रुख का विरोध कर रही है।
सत्र शुरू होने से पहले ही कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा परिसर में धरना प्रदर्शन किया। उन्होंने मांग उठाई कि वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से ही महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाए। विपक्ष का आरोप है कि सरकार महिलाओं के मुद्दे पर केवल राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे।
इस दौरान पुष्कर सिंह धामी भी सदन में मौजूद रहे और कार्यवाही पर नजर बनाए हुए हैं। माना जा रहा है कि सत्र के दौरान सरकार अपनी नीतियों का बचाव करेगी, जबकि विपक्ष सरकार को घेरने की पूरी कोशिश करेगा।
इसके साथ ही कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों द्वारा संसद में अपनाए गए रुख के विरोध में निंदा प्रस्ताव भी पेश किया जाएगा, जिसे लेकर सदन में बहस और हंगामे की पूरी संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सत्र केवल विधायी कार्यवाही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आगामी चुनावों के मद्देनजर एक बड़ा राजनीतिक मंच भी बनेगा।
उत्तराखंड विधानसभा का यह विशेष सत्र महिला आरक्षण के मुद्दे पर सियासी तापमान बढ़ाने वाला साबित हो सकता है, जिस पर प्रदेश ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी नजरें टिकी हुई हैं।



