
गाजियाबाद,(आनन्द धारा): 10 जून: गाजियाबाद पुलिस पर उत्पीड़न, फर्जी मुकदमा दर्ज करने और निष्पक्ष पत्रकारिता की आवाज दबाने के गंभीर आरोपों को लेकर जिला मुख्यालय के बाहर शुरू हुआ पत्रकारों का अनिश्चितकालीन धरना बुधवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारी पत्रकारों के हौसले इतने बुलंद हैं कि दिन की तपती धूप और रात में आए आंधी-तूफान व बारिश भी उन्हें डिगा नहीं सकी। दर्जनों पत्रकार साथी पूरी रात धरना स्थल पर डटे रहे और साफ कर दिया कि जब तक न्याय नहीं मिलता, उनका संघर्ष जारी रहेगा।
धरने का नेतृत्व कर रहीं वरिष्ठ पत्रकार अपूर्वा चौधरी ने पुलिस प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह आंदोलन किसी की व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है। यह लड़ाई उन सभी ईमानदार पत्रकारों की है जिनकी आवाज को दबाने का प्रयास किया जाता रहा है। हम इस तानाशाही के आगे घुटने नहीं टेकेंगे। हमारा आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और न्याय मिलने तक दिन-रात इसी तरह जारी रहेगा।
अपूर्वा चौधरी ने यह भी आरोप लगाया कि गाजियाबाद पुलिस प्रशासन को कई बार साक्ष्य और शिकायतें सौंपी जा चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर वे और उनके साथी 10 से अधिक बार संबंधित अधिकारियों से मिल चुके हैं, मगर हर बार उन्हें केवल खोखला आश्वासन ही हाथ लगा।
क्या है पूरा मामला?
धरनारत पत्रकारों के अनुसार, यह पूरा विवाद 20 मई की एक घटना से जुड़ा है सिद्धार्थ विहार स्थित जल निगम चौकी पर तैनात एक पुलिसकर्मी द्वारा पत्रकार ललित चौधरी के साथ अभद्रता और मारपीट की गई। पत्रकारों का आरोप है कि वास्तविक दोषी पुलिसकर्मी पर कार्रवाई करने के बजाय, पुलिस ने उल्टा पत्रकारों के खिलाफ ही फर्जी मुकदमा दर्ज कर दिया।
पत्रकारों ने प्रशासन के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए तीन मुख्य मांगें रखी हैं: फर्जी मुकदमा रद्द हो। दोषी पुलिसकर्मी निलंबित हों । मामले से जुड़े अन्य आरोपित व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उनकी जल्द से जल्द गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए।
अपूर्वा चौधरी ने दोहरे लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जिला स्तर पर उन्हें न्याय नहीं मिला, तो इस आंदोलन को प्रदेश स्तर पर ले जाया जाएगा। जरूरत पड़ने पर सभी पत्रकार लखनऊ स्थित पुलिस मुख्यालय (DGP ऑफिस) के बाहर भी धरना देने से पीछे नहीं हटेंगे।
एक्टिव जर्नलिस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारियों पंकज शर्मा, पवन चौधरी, सद्दाम हुसैन, उमेश त्यागी, महेश त्यागी, राजीव सिंह, सतीश कुमार, संजय भाटी सहित दर्जनों पत्रकार साथी रातभर धरना स्थल पर डटे रहे। और न्याय मिलने तक कंधे से कंधा मिलाकर साथ खड़े रहने का संकल्प लिया है।



