
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन देशों की महत्वपूर्ण विदेश यात्रा पर रवाना हो गए हैं। इस दौरे के तहत वह इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड का दौरा करेंगे। प्रधानमंत्री की यह यात्रा भारत के रणनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों को नई मजबूती देने के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी तीनों देशों के शीर्ष नेताओं से द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इन बैठकों में व्यापार और निवेश, रक्षा सहयोग, प्रौद्योगिकी, हरित ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। इसके अलावा आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain), डिजिटल साझेदारी और सेमीकंडक्टर जैसे उभरते क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
इंडोनेशिया के साथ भारत समुद्री सुरक्षा और आसियान (ASEAN) क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने पर ध्यान देगा। वहीं ऑस्ट्रेलिया के साथ रक्षा, शिक्षा, खनिज संसाधनों और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नए समझौतों की संभावना जताई जा रही है। न्यूजीलैंड के साथ कृषि, डेयरी, शिक्षा, पर्यटन और व्यापारिक संबंधों को विस्तार देने पर चर्चा होने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में यह यात्रा भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ और इंडो-पैसिफिक विजन को और मजबूत करेगी। साथ ही, क्षेत्रीय सुरक्षा, मुक्त एवं खुले समुद्री मार्ग तथा आर्थिक साझेदारी को बढ़ावा देने में भी यह दौरा महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा के दौरान कई समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर होने की संभावना है, जिससे निवेश, तकनीकी सहयोग और रक्षा साझेदारी को नई दिशा मिल सकती है। भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और विश्वसनीय साझेदार के रूप में उसकी छवि को भी इस दौरे से और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
सरकार का मानना है कि यह तीन देशों का दौरा भारत के दीर्घकालिक रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर सहयोग के नए अवसर भी खोलेगा।



