
(आनन्द धारा/पवन शर्मा)
बहराइच। उत्थान सेवा समिति के तत्वावधान में सुविख्यात श्री सतपाल महाराज जी की प्रेरणा से मानव धर्म मंदिर बहराइच में आयोजित 7 दिवसीय महान सत्संग कार्यक्रम के क्रम में छठे दिन का आयोजन अत्यंत भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता मंदिर की प्रभारी महात्मा संध्या बाई जी एवं प्रेम धारा बाई जी ने की।
इस अवसर पर प्रयागराज धाम से पधारे महात्मा श्री सारथानंद जी ने अपने प्रवचनों में कहा कि बच्चों को सत्संग से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यही उनके जीवन में भक्ति और संस्कारों का संचार करता है। उन्होंने मन को नियंत्रित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि जिस प्रकार बैल को नकेल से वश में किया जाता है, उसी प्रकार मन को भगवान के नाम के सुमिरन से नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने भगवान श्री कृष्ण और अर्जुन का उदाहरण देते हुए बताया कि ईश्वर के मार्गदर्शन से मोह का नाश होता है और जीवन में सफलता प्राप्त होती है।

वहीं काशी विश्वनाथ धाम से पधारी महात्मा सुजाता बाई जी ने कहा कि भगवान की कथा सुनने से मन शुद्ध होता है और वैराग्य उत्पन्न होता है। उन्होंने कहा कि बिना मन की पवित्रता के परमात्मा की प्राप्ति संभव नहीं है। सत्संग, भजन और सुमिरन के माध्यम से व्यक्ति परमात्मा के धाम तक पहुंच सकता है और जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो सकता है।
महात्मा प्रेमधारा बाई जी ने अपने प्रवचन में कहा कि बिना सद्गुरु के आत्मज्ञान संभव नहीं है। आत्मा के वास्तविक ज्ञान को प्राप्त करने के लिए सद्गुरु की शरण में जाना आवश्यक है, तभी जीवन का सच्चा उद्देश्य समझ में आता है।

सत्संग के दौरान उपस्थित श्रद्धालु संतों के प्रेरणादायक वचनों को सुनकर भाव-विभोर हो उठे और पूरे वातावरण में भक्ति एवं श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला।



