
(आनन्द धारा/राजकुमार शर्मा )
हापुड़, 25 अप्रैल 2026: कपूरपुर थाना क्षेत्र से पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। माननीय न्यायालय ने चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं, जिससे पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है।
पीड़ित विकास, निवासी नंगला छज्जू गांव, ने आरोप लगाया है कि उसे जबरन उठाकर थाने ले जाया गया। वहां उसके साथ बेरहमी से मारपीट की गई और कथित तौर पर “थर्ड डिग्री टॉर्चर” दिया गया। पीड़ित का यह भी आरोप है कि उससे टॉयलेट साफ कराया गया, जो अमानवीय व्यवहार की श्रेणी में आता है।
न्यायालय के इस सख्त रुख के बाद कई अहम सवाल उठ रहे हैं:
क्या पुलिस हिरासत में इस तरह की प्रताड़ना कानूनन जायज है?
क्या किसी व्यक्ति से टॉयलेट साफ कराना पुलिस की जिम्मेदारी का हिस्सा है?
क्या थाने न्याय के केंद्र हैं या फिर अत्याचार के स्थल बनते जा रहे हैं?
इस घटना ने न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे जिले में पुलिस की छवि को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि आरोपित पुलिसकर्मियों पर क्या कार्रवाई होती है और क्या पीड़ित को न्याय मिल पाता है।
यह मामला एक बार फिर पुलिस व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता की जरूरत को उजागर करता है।



