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‘दोषी हैं तो जेल भेजें’-अपूर्वा चौधरी का प्रशासन को खुला संदेश, धरने के सातवें दिन भंडारा आयोजित

गाजियाबाद,(आनन्द धारा)। जिला मुख्यालय के बाहर अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे पत्रकारों का अनिश्चितकालीन आंदोलन अब एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। भीषण गर्मी, आंधी और बारिश के बावजूद पत्रकार अपूर्वा चौधरी के नेतृत्व में दर्जनों पत्रकार खुले आसमान के नीचे दिन-रात धरने पर डटे हुए हैं। सोमवार को इस आंदोलन का सातवां दिन रहा।
इस अवसर पर धरना स्थल पर पूड़ी, सब्जी और रायते के एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। एक्टिव जर्नलिस्ट एसोसिएशन के महामंत्री पंकज शर्मा ने इस दौरान तंज कसते हुए कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों ने हमसे कहा था कि आप आंदोलन खा-पीकर करें, इसलिए अब हम खुद भी खा रहे हैं और दूसरों को भी खिला रहे हैं। वहीं, आंदोलन का नेतृत्व कर रहीं अपूर्वा चौधरी ने कहा, “अब धरना स्थल ही हमारा अस्थाई निवास है। आज सोमवार और अमावस्या का विशेष दिन है, इसलिए हमने इस भंडारे का आयोजन किया है। हमारा विरोध भ्रष्ट सिस्टम से है और इसका खात्मा करके ही हम दम लेंगे।
अपूर्वा चौधरी ने भावुक और आक्रोशित लहजे में गाजियाबाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने भ्रष्ट सिस्टम के खिलाफ आर-पार की जंग का ऐलान करते हुए कहा, यहाँ कोई भी अधिकारी लीपापोती या डीलिंग करने न आए, बल्कि निष्पक्ष कार्यवाही करे। अगर हम दोषी हैं तो जेल जाने को तैयार हैं। पुलिस प्रशासन आराम से काम करे, कोई जल्दबाजी न दिखाए। अगर हमने कोई अपराध किया है तो सबूत भी छोड़े होंगे, वैसे भी पुलिस सबूत बनाने में माहिर है। उन्होंने चेतावनी दी कि पुलिस को जो भी ढूंढना है जल्द ढूंढ ले, क्योंकि जब पत्रकारों के सब्र का बांध टूटेगा, तो भ्रष्ट पुलिसकर्मियों के काले कारनामों के चिट्ठे खोले जाएंगे।

अपूर्वा चौधरी ने गाजियाबाद पुलिस की एसीपी (ACP) उपासना पांडेय पर उनकी सामाजिक और व्यावसायिक छवि को जानबूझकर खराब करने का सीधा आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “मुझे अपनी जान से ज्यादा डर बदनामी से लगता है। मैंने अपने बच्चों से कह दिया है कि मैं घर में कदम तभी रखूंगी जब मुझे न्याय मिलेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि उन्हें गाजियाबाद के पुलिस कमिश्नर और एडिशनल कमिश्नर केशव चौधरी पर अभी भी पूरा भरोसा है कि वे निष्पक्ष कार्रवाई करेंगे।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि घटना को पूरे 27 दिन बीत चुके हैं, लेकिन गाजियाबाद पुलिस से एक छोटे से मामले की जांच तक नहीं हो पाई है। उन्होंने जिला पुलिस के दोहरे चरित्र पर सवाल उठाते हुए कहा कि जहां एक तरफ छोटी लापरवाहियों पर रोज दरोगाओं को सस्पेंड किया जा रहा है, वहीं इस मामले में सिर्फ 3 दिन का समय मांगा गया था, लेकिन 27 दिन बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
जैसे-जैसे यह आंदोलन लंबा खिंच रहा है, इसे समाज के विभिन्न वर्गों का भारी समर्थन मिल रहा है। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को बचाने की इस मुहिम में अपूर्वा चौधरी के साथ पंकज शर्मा, पवन चौधरी, वरिष्ठ पत्रकार संजय भाटी, विकास कुमार, ब्रजभूषण, सतीश कुमार, राजीव सिंह, रिहान जैदी, सुमन मिश्रा, उमेश त्यागी, महेश त्यागी, ब्रजभूषण शर्मा, ज्ञान भारद्वाज, सविता चौधरी, सुशील मौर्य, विपुल कुमार, अमन चौधरी, शकील सैफी सहित दर्जनों पत्रकार साथी मौजूद रहे। इसके साथ ही प्रीतपाल सिंह खोसला, संजीव तेवतिया, विनीत त्यागी और सतवीर सिंह जैसे वरिष्ठ समाजसेवियों ने भी धरना स्थल पर पहुंचकर अपना समर्थन दिया।

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