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गुरु आज्ञा में चलने पर ही शिष्य का कल्याण होता है : श्री सतपाल जी महाराज

मुरादनगर,(आनन्द धारा)। मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वावधान में गंगनहर स्थित सतलोक आश्रम गाजियाबाद के श्री हंस इंटर कॉलेज प्रांगण में 29 जुलाई 2026 को आयोजित गुरु पूजा महोत्सव के द्वितीय दिवस विशाल सत्संग समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सुविख्यात समाजसेवी एवं आध्यात्मिक गुरु श्री सतपाल जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि गुरु पूजा का पर्व शिष्य को ध्यान, सेवा, सत्संग तथा गुरु आज्ञा का पालन करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि गुरु की आज्ञा में चलने पर ही शिष्य का वास्तविक कल्याण संभव है।

श्री महाराज जी ने कहा कि जिस प्रकार गृहस्वामी अपने घर का कूड़ा बाहर निकालकर उसे स्वच्छ रखता है, उसी प्रकार मनुष्य को भी अपने मन में व्याप्त ईर्ष्या, द्वेष एवं अन्य विकारों रूपी कूड़े को बाहर निकालना चाहिए। यह कार्य सत्संग श्रवण और उसके उपदेशों को जीवन में अपनाने से ही संभव है। उन्होंने कहा कि सत्संग का उद्देश्य केवल सुनना नहीं, बल्कि उसके संदेशों को व्यवहार में उतारना है, तभी मन निर्मल और पवित्र बनता है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विश्व अशांति के दौर से गुजर रहा है। एक देश दूसरे देश से युद्ध कर रहा है, जिसके कारण सरकारों को विकास कार्यों के बजाय युद्ध सामग्री के निर्माण पर भारी धनराशि व्यय करनी पड़ रही है। यदि आध्यात्म का व्यापक प्रचार-प्रसार हो और मानवता में सद्भावना का विकास हो, तो देश ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में शांति स्थापित हो सकती है।

रामचरितमानस का उल्लेख करते हुए श्री सतपाल जी महाराज ने कहा कि जब-जब धर्म की हानि होती है, तब-तब महान ज्ञानी पुरुष धर्म की स्थापना के लिए धरती पर अवतरित होते हैं। उन्होंने कहा कि आज भले ही राक्षसों का स्वरूप बदल गया हो, लेकिन आतंकवाद, हिंसा और मानव द्वारा मानव की हत्या जैसी घटनाएं अधर्म का ही रूप हैं। ऐसे समय में महान पुरुष ज्ञान का प्रकाश फैलाकर लोगों के भीतर धर्म और मानवता की स्थापना करते हैं।

इस अवसर पर पूज्य माता श्री अमृता जी ने कहा कि गुरु महाराज की आज्ञा का पालन करते हुए नियमित भजन-सुमिरन करें तथा जहां भी सत्संग हो, उसमें अवश्य सहभागी बनें। उन्होंने कहा कि सत्संग और गुरु दर्शन से मन का मैल दूर होता है तथा हृदय पुनः स्वच्छ, निर्मल और पवित्र बनता है। सत्संग से भजन की प्रेरणा मिलती है और भजन-सुमिरन से ही भक्त का कल्याण संभव है।

कार्यक्रम में परम पूज्य श्री सतपाल जी महाराज, पूज्य माता श्री अमृता जी एवं अन्य संत-महात्माओं का माल्यार्पण कर स्वागत किया गया। भजन गायकों ने अपनी मधुर प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। कार्यक्रम का संचालन संतोषानंद जी ने किया।

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