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राज बब्बर 30 साल बाद बरी, लखनऊ कोर्ट ने सजा और जुर्माना रद्द किया

लखनऊ। चुनाव के दौरान हुई हिंसा से जुड़े 30 साल पुराने मामले में विशेष न्यायाधीश (एमपी/एमएलए कोर्ट) ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद राज बब्बर को बरी कर दिया है। अदालत ने निचली अदालत द्वारा दिए गए दोषसिद्धि के आदेश को निरस्त करते हुए उनकी अपील को स्वीकार कर लिया।

इस मामले की सुनवाई के दौरान राज बब्बर स्वयं अदालत में उपस्थित रहे। विशेष न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितियों के आधार पर निचली अदालत का निर्णय टिक नहीं पाता। इसके साथ ही मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा सुनाई गई दो वर्ष की सजा और 6,500 रुपये के जुर्माने को भी समाप्त कर दिया गया।

यह मामला चुनावी हिंसा से जुड़ा था, जिसमें राज बब्बर पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने प्रदर्शन के दौरान कानून व्यवस्था भंग की। हालांकि, लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने उन्हें सभी आरोपों से मुक्त कर दिया।

फैसले के बाद राज बब्बर के समर्थकों में खुशी का माहौल देखने को मिला। अदालत परिसर के बाहर उनके समर्थकों ने इस निर्णय का स्वागत किया और इसे न्याय की जीत बताया। वहीं, कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने भी इस फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि सच्चाई की अंततः जीत हुई है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला उन मामलों के लिए अहम मिसाल बन सकता है, जिनमें लंबे समय तक न्यायिक प्रक्रिया चलती रहती है। इस निर्णय से यह भी स्पष्ट होता है कि अदालतें साक्ष्यों के आधार पर ही अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचती हैं।इस फैसले ने एक लंबे समय से चल रहे विवाद का अंत कर दिया है और राज बब्बर को बड़ी राहत प्रदान की है।

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