एस.जी. होम्स वसुंधरा में महिला काव्य मंच की काव्य गोष्ठी आयोजित, रचनाकारों ने साहित्य के माध्यम से समाज को दिया सशक्त संदेश

गाज़ियाबाद। वसुंधरा स्थित एस.जी. होम्स सोसायटी में महिला काव्य मंच, जिला गाज़ियाबाद यूनिट के तत्वावधान में आयोजित काव्य गोष्ठी में 20 रचनाकारों ने पारिवारिक, सामाजिक तथा देश में घटित समसामयिक घटनाओं पर आधारित रचनाओं का प्रभावशाली पाठ किया। कवियों ने अपने विचारों के माध्यम से यह संदेश दिया कि रचनाकारों को बिना किसी दबाव के अपनी बात कहने का अधिकार है। मनःस्थिति पर आधारित रचनाओं ने मंचासीन अतिथियों और श्रोताओं को गहरे स्तर पर प्रभावित किया।
कार्यक्रम में साहित्य की विभिन्न विधाओं—गीत, ग़ज़ल, दोहा, मुक्तक, कविता एवं छंदमुक्त रचनाओं—का सुंदर संगम देखने को मिला।
काव्य गोष्ठी के दौरान कवयित्री तारा गुप्ता ने अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए कहा— “आ रहा ख्याल मन में बिना बात है,
कुछ दिनों की ही तो चांदनी रात है।
यूँ लगा आज पूरी सदी मिल गई,
चंद लम्हों की बेशक मुलाकात है।”
शोभा सचान ने अपनी भावपूर्ण रचना में जीवन के दर्द और संवेदनाओं को शब्द देते हुए कहा— “हमने अपने मन की बातें कविताओं में लिख डालीं,
तन्हाई की काली रातें कविताओं में लिख डालीं।
जब भी ग़म के आँसू लेकर छुप-छुप करके हम रोए,
आँखों से झड़ती बरसातें कविताओं में लिख डालीं।”
आशु सिंह ने सामाजिक कटाक्ष करते हुए अपनी रचना में कहा— “निहत्थों पर वार किया जा रहा है,
नीलाम अख़बार किया जा रहा है।”
अरुण चौरसिया ने माता-पिता के प्रति अपनी भावनाएँ व्यक्त करते हुए कहा— “दुआ माँ की मेरे लिए खास है,
सफर में जो रहती मेरे साथ है।
पकड़कर न छोड़ा जिसे आज तक,
ये पिता का मेरे हाथ में हाथ है।”
वहीं मोनिका मासूम ने जीवन की यात्रा को अपनी रचना में इन शब्दों में व्यक्त किया— “सफर रात-दिन का और मैं हूँ,
फकत एक रास्ता और मैं हूँ।”
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. अलका अग्रवाल, श्री पीयूष कांति तथा अरुण चौरसिया की गरिमामयी उपस्थिति रही। अंत में सभी अतिथियों एवं महिला काव्य मंच, जिला गाज़ियाबाद यूनिट की पूरी समिति को सफल आयोजन के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी गईं।






